पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने की मुहिम तेज है, लेकिन समय की कमी ने विवाद खड़ा कर दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर समय सीमा बढ़ाने संबंधी मांगों पर स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाओं में कहा गया कि स्पेशल समरी रिवीजन में कई पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए।
वकीलों ने जजों को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों और सीमावर्ती जिलों में सत्यापन प्रक्रिया धीमी है। 10 लाख से ज्यादा नाम हटाने का प्रस्ताव विवादास्पद है। ईसीआई का कहना है कि समय बढ़ाने से अंतिम सूची प्रकाशन में बाधा आएगी।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा। सत्ताधारी TMC ने इसे विपक्षी षड्यंत्र बताया, वहीं NDA ने ‘चुनावी जाल’ का आरोप लगाया। कोर्ट ने दो हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा।
इसमें जोड़े-हटाए गए नामों का विवरण, आपत्ति निस्तारण और आगे की योजना शामिल होगी। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने BLOs की तैनाती बढ़ाई है और ई-एपिक व वोटर हेल्पलाइन सक्रिय की।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए मतदाता सूची में कोई चूक बर्दाश्त नहीं। आधार, वोटर आईडी लिंकिंग में सुधार जरूरी। यह घटना चुनाव सुधारों पर नई बहस छेड़ सकती है।
निष्कर्षतः, ईसीआई को संतुलित रुख अपनाना होगा। समय बढ़ाकर या डिजिटल माध्यमों से समस्या सुलझाई जा सकती है। बंगाल का हर वोट मायने रखता है, इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी।