राज ठाकरे के विवादित बयान पर टीएमसी नेता माजिद मेमन ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मराठी-गैर मराठी विभाजनकारी सोच को असंवैधानिक बताते हुए ठाकरे की आलोचना की और सभी समुदायों के बीच एकता का आह्वान किया।
ठाकरे ने हालिया सभा में गैर-मराठी लोगों को नौकरी और आवास में स्थानीय मराठियों के हक पर डाका मारने वाला बताया। यह बयान नस्लीय तनाव को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जो 2008 के हिंसक आंदोलनों की याद दिलाता है।
मेमन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘ऐसी सोच संविधान के खिलाफ है। सभी भारतीयों को समान अधिकार हैं। ठाकरे का यह रुख महाराष्ट्र को कमजोर करेगा।’ उन्होंने आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रवासियों की भूमिका रेखांकित की।
‘मुंबई का विकास सभी का साझा प्रयास है। आईटी, हीरा व्यापार और बॉलीवुड में गैर-मराठियों का योगदान असीम है। इसे नकारना मूर्खता है,’ मेमन ने जोर देकर कहा। टीएमसी महाराष्ट्र में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
यह टकराव आगामी निगरानी चुनावों से जुड़ा दिखता है। मनसे की घटती लोकप्रियता के बीच ठाकरे का यह प्रयास जोखिम भरा है। अन्य दल जैसे शिवसेना-यूबीटी ने भी समर्थन जताया।
सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। मेमन का संदेश साफ है—’एकता ही प्रगति का आधार है।’ महाराष्ट्र जैसे विविध राज्य में यह मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।