कछार जिले से बड़ी खबर, जहां असम पुलिस ने एक फर्जी डॉक्टर को उसके अवैध क्लिनिक से दबोच लिया। यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब मरीजों ने उसके गलत इलाज से परेशान होकर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
रात के अंधेरे में छापेमारी के दौरान पुलिस को नकली दवाओं का भंडार, बिना लाइसेंस के इंजेक्शन किट और फर्जी डिग्री मिलीं। आरोपी गरीबों को ललचाकर जड़ी-बूटियों के नाम पर एलोपैथिक दवाएं थमा रहा था, जिससे कईयों की जान को खतरा हो गया।
राज्य स्तर पर झोलाछापों के खिलाफ मुहिम तेज हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में ऐसी प्रवृत्ति रोकनी जरूरी है। आरोपी से पूछताछ में उसके साथी भी फंस सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने पुलिस का धन्यवाद किया और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की। विशेषज्ञ चेताते हैं कि देरी से सही इलाज न मिलने से जानलेवा बीमारियां फैलती हैं। सरकार अब पल्स पोलियो जैसे कार्यक्रमों के साथ क्लिनिक सत्यापन को जोड़ेगी।
यह गिरफ्तारी न केवल एक खतरे को रोकेगी बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला देगी। असम में स्वास्थ्य सुरक्षा के नए दौर की शुरुआत हो चुकी है।