महाराष्ट्र की राजनीति में सुप्रिया सुले का नाम हमेशा चर्चा में रहता है। आईएएनएस के विशेष साक्षात्कार में एनसीपी (एसपी) सांसद ने निकाय चुनावों की विशेषता बताते हुए कहा, ‘सभी चुनावों का पैटर्न अलग-अलग होता है, लेकिन ये चुनाव मूलभूत मुद्दों तक सीमित रहते हैं।’
उन्होंने समझाया कि राष्ट्रीय चुनावों में बड़ी-बड़ी योजनाओं की बात होती है, लेकिन स्थानीय चुनावों में बात सीधी आती है—टूटी सड़कें, गंदा पानी, बिजली कटौती और कूड़े के ढेर। पुणे से लेकर ठाणे तक इन समस्याओं ने लोगों को त्रस्त कर दिया है। सुले ने कहा, ‘प्रशासन की नाकामी स्पष्ट दिख रही है।’
चुनाव आयोग की तैयारियों के बीच सुले ने सत्ताधारियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वोटर अब खोखले वादों पर भ्रमित नहीं होंगे। ‘जो पार्टी जमीन पर काम करेगी, वही जीतेगी,’ उनका दावा है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को सुप्रिया ने मोहल्ला स्तर पर सक्रिय होने का आदेश दिया। सोशल मीडिया के जरिए शिकायतों का तुरंत समाधान और पारदर्शिता ही सफलता की कुंजी है। महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में युवा वोटरों का झुकाव भी इसी दिशा में है।
यह चुनाव न केवल स्थानीय शासन की परीक्षा लेगा, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करेगा। सुप्रिया सुले के विचार विपक्ष को नई ऊर्जा दे रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं पर जोर देकर ही असली बदलाव संभव है।