पटना के ऐतिहासिक गोलघर पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मरम्मत कार्यों में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की। 1786 में निर्मित इस विशालकाय अनाज भंडार को पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए तेजी से काम करने का आदेश दिया।
145 सीढ़ियां चढ़कर शिखर तक पहुंचे सीएम ने क्षतिग्रस्त दीवारों, टपकते गुंबद और अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की कमियों को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों को 6 महीने में कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया। ‘ऐतिहासिक धरोहरों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी,’ उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
निर्देशों में आईआईटी विशेषज्ञों द्वारा संरचनात्मक ऑडिट, गुंबद का वाटरप्रूफिंग, क्षतिग्रस्त रेलिंग परिवर्तन शामिल हैं। पटना नदीतट विकास योजना से जोड़कर सांस्कृतिक हब बनाने की योजना है।
25 करोड़ अतिरिक्त बजट स्वीकृत करते हुए सीएम ने साउंड एंड लाइट शो, स्मृति चिन्ह दुकानें और स्थानीय व्यंजनों पर आधारित फूड कोर्ट का आदेश दिया। दिव्यांगों के लिए रैंप और ईवी चार्जिंग स्टेशन भी अनिवार्य किए।
इतिहासकारों ने धरोहर संरक्षण पर जोर देने का स्वागत किया। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटकों की संख्या तीन गुना बढ़ेगी। यह पहल बिहार सरकार के सतत विकास मॉडल को मजबूत करेगी।