असम के युवा अपनी सरकार के व्यावहारिक नारे से प्रभावित हैं—‘मेहनत करो, नौकरी तुम्हारी।’ बेरोजगारी के खिलाफ यह जंग अब सकारात्मक रूप ले चुकी है, जहां युवा स्वयं आगे आ रहे हैं।
राज्य सरकार ने आईटी, कृषि प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा किए हैं। डिब्रूगढ़ की प्रिया सैकिया जैसी युवतियां कहती हैं, ‘सरकारी वर्कशॉप ने मुझे जैविक खेती का उद्यमी बना दिया। आत्मनिर्भरता का यह संदेश प्रेरणादायक है।’
असम स्किल डेवलपमेंट मिशन ने एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया, जिनमें 70 प्रतिशत को छह माह में नौकरी मिली। रोजगार पोर्टल पर 20 प्रतिशत अधिक ट्रैफिक दर्ज किया गया है। 50 नए औद्योगिक पार्क और वैश्विक कंपनियों के एमओयू से रोजगार के द्वार खुल रहे हैं।
विपक्ष इसे चुनौतियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाता है, लेकिन परिणाम बोलते हैं—शहरी बेरोजगारी दर घटी, स्टार्टअप्स में उछाल आया।
असम विजन 2030 के तहत एआई आधारित जॉब मैचिंग और इंटर्नशिप से भविष्य तैयार हो रहा है। युवाओं का उत्साह बताता है कि सही दिशा में मेहनत ही सफलता की कुंजी है। यह साझेदारी असम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।