तमिलनाडु के मुखिया एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के जाति आधारित जनगणना के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया। कोयंबटूर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह कदम करोड़ों लोगों के हक की लड़ाई को मजबूत करेगा।
स्वतंत्र भारत में पहली बार होने वाली इस व्यापक जातिगत गणना से नीति निर्माण में पारदर्शिता आएगी। स्टालिन ने तमिलनाडु की प्रगतिशील आरक्षण नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि आंकड़ों पर आधारित निर्णय ही न्यायसंगत होते हैं।
जनगणना में जाति के साथ उप-जातियों का भी विवरण होगा, जो आरक्षण वितरण को और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार पूर्ण सहयोग के लिए तैयार है।
केंद्र-राज्य संबंधों में यह फैसला नया मोड़ ला सकता है। स्टालिन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा संग्रह की वकालत की ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
तमिलनाडु में पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए यह सुनहरा अवसर है। मुख्यमंत्री ने युवाओं और किसान संगठनों की मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि अब वास्तविक आंकड़े उपलब्ध होंगे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर है। स्टालिन का उत्साहपूर्ण समर्थन द्रविड़ राजनीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है। यह जनगणना सामाजिक समीकरणों को नया आकार देगी।