असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री की हिंदू पहचान को सभ्यतागत धरोहर से जोड़ते हुए कहा कि यह संविधान का विषय नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। रैली में दिए गए इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
‘हमारा हिंदू होना रगों में बसा है, जो ऋग्वेद काल से चला आ रहा है। पीएम उस परंपरा के प्रतीक हैं, न कि किसी कागजी दस्तावेज के,’ सरमा ने कहा। उन्होंने हिंदू सभ्यता को दर्शन, कर्मकांड और सामाजिक मूल्यों का समग्र रूप बताया।
विपक्षी नेता इसे धर्मनिरपेक्षता पर हमला बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे सच्चाई का आईना मानते हैं। सरमा ने महाभारत और गुप्त काल के उदाहरण देकर तर्क दिया कि प्राचीन शासकों ने धर्म के बिना संविधान चलाया। उन्होंने पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता को भारत के लिए अनुपयुक्त करार दिया।
यह बयान चुनावी समर में भाजपा को लाभ पहुंचा सकता है। यह भारत के सांस्कृतिक इतिहास और आधुनिक संविधान के टकराव को उजागर करता है। सरमा ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी विरासत को गले लगाएं। कुल मिलाकर, यह बयान राष्ट्रीय बहस को नई दिशा दे रहा है, जहां सभ्यता और कानून का संतुलन केंद्र में है।