मणिपुर की सियासी गलियारों में तूफान उठा है। आईटीएलएफ ने घोषणा की है कि कूकी-जो विधायक राज्य सरकार में शामिल होने या उसका समर्थन करने से दूर रहेंगे। यह फैसला एक साल से अधिक समय से जारी जातीय संघर्ष के बीच आया है, जिसमें सैकड़ों जानें जा चुकी हैं।
संगठन के प्रवक्ता ने कहा, ‘बीरेन सिंह वाली सरकार में हमारा कोई विधायक मंत्री नहीं बनेगा।’ कूकी समुदाय सरकार पर हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराता है। मीती-कूकी झड़पों में教会 और गांव जलाए गए, 60 हजार लोग शरणार्थी बन गए।
हालिया चुनावों में भाजपा को बहुमत मिला, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में कूकी विधायकों का बहिष्कार सत्ता को चुनौती देगा। संगठन ने मीती उग्रवादियों को हथियार और केंद्रीय सहायता का आरोप लगाया। मांग है अलग प्रशासनिक व्यवस्था की।
केंद्र सरकार शांति समितियां गठित कर चुकी है, लेकिन विश्वास की कमी बनी हुई है। विधानसभा सत्र ठप हो सकते हैं। विश्लेषक कहते हैं, यह कदम मणिपुर की एकता के लिए खतरा है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त है। स्कूल बंद, अर्थव्यवस्था चरमराई। आईटीएलएफ का दृढ़ रुख बताता है कि सुलह लंबी प्रक्रिया होगी। केंद्र को नया रोडमैप तलाशना होगा।