केरल में सबरीमाला मंदिर की पवित्र धरोहर पर हाथ साफ करने वाले चोरों ने राजनीतिक भूचाल ला दिया। भाजपा ने चोरी को सीपीआई(एम) और कांग्रेस के गुप्त समझौते का परिणाम बताते हुए जोरदार प्रहार किया। राज्य अध्यक्ष सुरेंद्रन ने चेतावनी दी कि यह आस्था की लूट का काला अध्याय है।
भगवान अयप्पा के धाम से दान किए गए सोने के आभूषणों के गायब होने से भक्त समुदाय सन्नाटे में है। मंदिर बोर्ड के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलीं, जिससे अंदरूनी साजिश के संकेत मिले। भाजपा ने मांग उठाई कि केंद्र सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराए।
प्रेस वार्ता में सुरेंद्रन ने कहा कि एलडीएफ की लापरवाही और कांग्रेस की संलिप्तता से यह चोरी संभव हुई। उन्होंने मंदिर सुरक्षा पर सवाल उठाए और राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील की। भक्तों ने पंबा में धरना शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री विजयन ने एसआईटी का ऐलान किया, लेकिन विपक्ष इसे ढोंग बता रहा है। सीपीआई(एम) ने भाजपा को भड़काऊ राजनीति का दोषी ठहराया। कांग्रेस ने तथ्यों पर ध्यान देने की नसीहत दी। फोरेंसिक जांच चल रही है, जिसमें स्टाफ से पूछताछ हो रही।
यह घटना 2018 के सबरीमाला विवाद को फिर से जिंदा कर रही है। चुनावी साल में भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाने की फिराक में है। मंदिर की प्रतिष्ठा बचाने और चोरों को पकड़ने की चुनौती राज्य सरकार के सामने है। भक्तों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा।