रक्षा खडसे ने युवाओं से अपील की कि विकसित भारत की परिकल्पना में उनके ताजा विचारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राष्ट्रीय युवा मंच पर अपने संबोधन में उन्होंने पारंपरिक नीति प्रक्रिया की आलोचना की और सहभागी मॉडल की वकालत की।
देश की औसत आयु 28 वर्ष होने का उल्लेख करते हुए खडसे ने कहा, ‘यह जनसांख्यिकीय लाभ युवा इनोवेशन से ही फलित होगा।’ जलवायु परिवर्तन, एआई और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में युवा योगदान पर जोर दिया।
सम्मेलन में युवाओं ने ग्रामीण विद्युतीकरण, मानसिक स्वास्थ्य और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रस्तुतियां दीं। खडसे ने स्थानीय स्तर पर युवा सलाहकार समितियां गठित करने की घोषणा की।
एस्टोनिया और रवांडा जैसे देशों के सफल मॉडल का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं को नजरअंदाज करना विकास यात्रा में बाधा बनेगा।
यह आह्वान भारत को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जाता है जहां युवा शक्ति नीतियों का केंद्र बनेगी, जिससे समृद्ध और न्यायपूर्ण राष्ट्र का निर्माण होगा।