रोहिणी आचार्य की ऐतिहासिक विरासत को उनके ही अपनों ने तहस-नहस कर दिया। महत्वाकांक्षा और स्वार्थ की आग में जलकर यह साम्राज्य राख हो गया, जिसने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया।
रिश्तेदारों ने सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र रचा। उन्होंने फर्जी दस्तावेज बनाए, धन हड़पने के लिए शेल कंपनियां गठित कीं और रोहिणी को कमजोर हालात में फंसाया।
परिवार की शान बढ़ाने वाली संपत्तियां बिक गईं, निवेश डूब गए और संस्थाएं विघटित हो गईं। रोहिणी ने कानूनी हथियार उठाए, लेकिन साजिश इतनी गहरी थी कि वापसी मुश्किल हो गई।
परिचितों का कहना है कि यह विश्वास का सबसे बड़ा धोखा है। रोहिणी अब पुनर्निर्माण की योजना बना रही हैं, समर्थकों के साथ। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और सच्चाई उजागर होने की उम्मीद है।
यह कांड विरासत विवादों पर नई बहस छेड़ता है। रोहिणी का संघर्ष लाखों लोगों को प्रेरित करेगा, जो पारिवारिक कलह का शिकार हैं। न्याय की जीत ही असली विजय होगी।