पश्चिम बंगाल की SIR योजना से जुड़े डेटा-एंट्री ऑपरेटर भर्ती घोटाले ने हंगामा मचा दिया है। आई-पैक केंद्रों पर स्टाफ की नियुक्ति को लेकर युवाओं की शिकायतों पर चुनाव आयोग ने एक्शन ले लिया है। आरोप है कि मेरिट की अनदेखी कर पावरफुल लॉबी ने नौकरियां हथिया लीं।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव और रिकॉर्ड में विसंगतियों की शिकायतें आयोग तक पहुंचीं। जांच टीमों ने दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और गवाहों के बयान दर्ज हो रहे हैं। एक प्रभावित उम्मीदवार ने बताया, ‘मैंने परीक्षा पास की, लेकिन नौकरी किसी और को मिल गई।’
राज्य सरकार योजना को युवा सशक्तिकरण का दावा कर रही है, लेकिन सबूत उल्टा बयान दे रहे हैं। विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहा है। आयोग ने चेतावनी दी है कि दोषी सिद्ध होने पर सख्त सजा होगी।
यह घटना बंगाल के भर्ती घोटालों की लंबी फेहरिस्त में शामिल हो गई है। बेरोजगार युवा सड़कों पर उतर आए हैं, पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग की इस पहल से उम्मीद जगी है कि भविष्य में डिजिटल और निष्पक्ष भर्ती संभव होगी।
निष्कर्षतः, यह जांच न केवल SIR योजना को प्रभावित करेगी बल्कि पूरे राज्य की नौकरी व्यवस्था पर सकारात्मक असर डालेगी।