झारखंड में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने 23 जिलों के लिए नए अध्यक्षों की सूची जारी करते हुए अपनी रणनीति का पिटारा खोल दिया। यह घोषणा राज्य के सामाजिक ताने-बाने को साधने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
सूची पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम में सवर्ण नेता, सिंदेगा में आदिवासी चेहरा और संथाल परगना के सात जिलों में स्थानीय नेता प्रमुखता से दिख रहे हैं। यह चयन जाति-जनगणना और मतदाता विश्लेषण पर आधारित है।
पार्टी के संगठन महामंत्री करम प्रकाश सिंह ने कहा, ‘ये हमारे संगठन की नसों में नया खून हैं। झारखंड की हर धड़कन को हम मजबूत करेंगे।’ यह बदलाव राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर किया गया, जिसमें जमीनी फीडबैक को प्राथमिकता दी गई।
हेमंत सोरेन सरकार पर खनन घोटाले और युवाओं की निराशा का दबाव है। भाजपा इसे अवसर के रूप में देख रही है। 2019 में 25 सीटें जीतने वाली पार्टी अब 40 का लक्ष्य लेकर चल रही है। नए जिला अध्यक्ष सदस्यता अभियान और प्रशिक्षण शिविरों से बूथ मजबूत करेंगे।
गठबंधन दलों ने तीखी आलोचना की, लेकिन भाजपा के शाखा स्तर पर जोश लौट आया है। गिरिडीह, गोड्डा जैसे झामुमो के गढ़ों में घेराबंदी तेज होगी।
यह न केवल चुनावी रणनीति है बल्कि लंबे समय की योजना। ये नेता पार्टी की डबल इंजन विकास एजेंडे को जमीन पर उतारेंगे। झारखंड की धरती पर सामाजिक समरसता का यह प्रयोग सफल होगा या नहीं, समय बताएगा। लेकिन भाजपा ने मैदान में मजबूत उतरने का संदेश दे दिया है।