पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट में पथराव की घटना ने कानूनी रंग ले लिया है। स्थानीय अदालत ने पांच मुख्य आरोपियों द्वारा दाखिल जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस थमा दिया। पुलिस का पक्ष सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
हाल के दिनों में हुई इस झड़प में ग्रेनेड जैसे पत्थरों की बौछार से पुलिस टीम हिल गई। कई जवान घायल हुए और वाहनों को क्षति पहुंची। एफआईआर में दंगा भड़काने, चोट पहुंचाने और संपत्ति नष्ट करने के धारा दर्ज की गईं।
आरोपियों के अधिवक्ताओं ने दावा किया कि गिरफ्तारी राजनीतिक दबाव में हुई। उन्होंने सबूतों की कमी का हवाला दिया और जमानत पर रिहा करने की अपील की। कुछ ने स्वास्थ्य आधार भी गिनाए।
जज ने मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट और साक्ष्य सौंपने को कहा। सुनवाई की अगली तारीख नजदीक है। तुर्कमान गेट का इलाका झुग्गी-झोपड़ियों और ऐतिहासिक धरोहर का मिश्रण है, जहां सफाई, बिजली-पानी की समस्या आम हैं।
ये घटनाएं अक्सर सामाजिक असंतोष को जन्म देती हैं। मानवाधिकार संगठन गिरफ्तारियों पर सवाल उठा रहे हैं। पुलिस वीडियो और गवाहों के बयानों से अपना केस मजबूत करने को तैयार है।
न्यायालय का फैसला न सिर्फ इन आरोपियों का भविष्य तय करेगा, बल्कि दिल्ली में भीड़ हिंसा के मामलों की जांच पर भी असर डालेगा। शांति के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।