राजस्थान के करौली में सत्ताधारी सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर मांग की है। भारत को ‘सनातन राष्ट्र’ घोषित किया जाए, न कि केवल ‘हिंदू राष्ट्र।’ यह प्रस्ताव सनातन धर्म की समावेशी प्रकृति पर जोर देता है।
स्थानीय नेताओं ने भव्य सभा में कहा कि सनातन शाश्वत सत्य का प्रतीक है। भगवद्गीता जैसे ग्रंथ सार्वभौमिक सिद्धांत सिखाते हैं। ‘देश को अपनी असली पहचान अपनानी चाहिए,’ जिला प्रमुख बोले।
यह विचार राजस्थान के सांस्कृतिक पुनरुत्थान से जुड़ा है। पुरातात्विक प्रमाण सनातन प्रथाओं की प्राचीनता दर्शाते हैं। युवा सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं।
धर्मनिरपेक्ष समूह इसे बहुसंख्यकवाद बता रहे हैं। ‘भारत की एकता को खतरा,’ एक कार्यकर्ता ने चेताया। राजनीतिक विश्लेषक चुनावी रणनीति देखते हैं।
संवैधानिक रूप से प्रस्ताव चुनौतीपूर्ण है। प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द बाधा बनेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले विचारणीय हैं।
देशव्यापी चर्चा तेज है। करौली की यह मांग सभ्यतागत बहस को नई दिशा दे रही है। प्रतीकात्मक महत्व अपार है।