ईडी द्वारा आई-पैक ऑफिस और प्रतीक जैन के निवास पर की गई छापेमारी से तृणमूल कांग्रेस में रोष फैल गया। पार्टी ने पूरे बंगाल में विरोध मार्च निकाले, जो राजनीतिक हलचल को चरम पर ले गए।
कलकत्ता में भारी भीड़ जमा हुई, जहां नारे गूंजे – ‘ईडी हटाओ, लोकतंत्र बचाओ।’ कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह केंद्रीय सत्ता का दुरुपयोग है, जिसका मकसद टीएमसी की चुनावी मशीनरी को तोड़ना है। आई-पैक ने डेटा एनालिटिक्स से पार्टी को मजबूत बनाया था।
छापे में ईडी ने लैपटॉप, फाइलें और सर्वर जब्त किए। प्रतीक जैन से घंटों पूछगछाल हुई, जो पार्टी की डिजिटल रणनीति के सूत्रधार हैं। ममता बनर्जी ने इसे ‘गैर-लोकतांत्रिक कदम’ बताया और पूरे देश से समर्थन मांगा।
पुलिस ने हालात नियंत्रित रखे, लेकिन ट्रैफिक ठप हो गया। नेताओं ने कहा कि भाजपा सत्ता के नशे में बंगाल को कमजोर करना चाहती है। कानूनी लड़ाई के साथ सड़क पर संघर्ष जारी रहेगा।
यह विवाद राज्य चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। टीएमसी इसे जनसमर्थन जुटाने का मौका मान रही है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार उजागर करने का दावा कर रहा है। बंगाल की सियासत में नया अध्याय शुरू हो चुका है।