कौशल भारत अभियान को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश आगे बढ़ा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक शिक्षुता को प्रोत्साहित करने वाली पॉलिसी जारी की। मुख्य आकर्षण- शिक्षु वेतन की पूरी प्रतिपूर्ति।
छोटे उद्योगों की लंबी समस्या का समाधान। अब वे बिना आर्थिक बोझ के युवाओं को प्रशिक्षित कर सकेंगे। 6 माह से 3 वर्ष तक के कोर्स, 250 से अधिक ट्रेड्स में विकल्प।
राज्य में औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है। लखनऊ ऑटो हब, नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स, कानपुर चमड़ा- सभी जगह कुशल हाथों की दरकार। यह योजना उस कमी को पूरा करेगी।
बड़े उद्योग 15 प्रतिशत कोटा पूरा करेंगे। महिलाओं के लिए अतिरिक्त लाभ। आईटी, हेल्थकेयर, कृषि- सभी क्षेत्र कवर।
कानपुर के एक टेक्सटाइल यूनिट ने 20 शिक्षु रखे। मालिक बोले, ‘लागत शून्य, उत्पादकता दोगुनी।’
तकनीकी रूप से सशक्त योजना। मोबाइल ऐप, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार दूर। जिला स्तर पर निगरानी समितियां।
2025 तक 5 लाख शिक्षु लक्ष्य। इससे 15 लाख नौकरियां सृजित होंगी। योगी का संकल्प- युवा शक्ति से 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी। यह कदम उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।