चुनावी बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा को आंखें दिखाते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को पार्टी की गहरी निराशा का नतीजा बताया। श्रीनगर में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने ईडी-सीबीआई की कार्रवाइयों को विपक्ष-विरोधी अभियान करार दिया।
मुफ्ती ने कहा, “सत्ता के नशे में संस्थाएं बर्बाद हो रही हैं। भाजपा को लग रहा है कि बिना इनके सहारे चुनाव नहीं जीत सकती।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मामलों का हवाला देते हुए दावा किया कि ये छापे और पूछताछ चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पीडीपी कार्यकर्ताओं पर लगाए जा रहे झूठे केसों का जिक्र किया और सुप्रीम कोर्ट से स्वतंत्र जांच की मांग की। कश्मीर में राजनीतिक कैदियों की रिहाई और निष्पक्ष चुनाव का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा, “डर से लोकतंत्र कमजोर होता है।”
यह बयान विपक्ष के एकजुट स्वर को मजबूत करता है, जहां कांग्रेस से लेकर आप तक सभी एजेंसी दुरुपयोग की शिकायत कर रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि महबूबा का यह हमला भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मुफ्ती का रुख पीडीपी को नई ऊर्जा दे रहा है। भाजपा की ओर से इसे खारिज करने की कोशिश हो रही है, लेकिन जनता का फैसला अंतिम सत्य होगा। यह संघर्ष लोकतंत्र की असली परीक्षा है।