दिल्ली विधानसभा चुनावी माहौल में गरमाती जा रही है। आप के दो विधायकों के विरुद्ध लगी शिकायतें अब विशेषाधिकार समिति के पास पहुंच गई हैं। स्पीकर ने सदन में इसकी घोषणा की, जो विधायी अनुशासन पर सवाल उठाती है।
ये शिकायतें विपक्ष द्वारा दाखिल की गईं, जिसमें बहस के दौरान कथित उग्रता और असंयमित टिप्पणियों का आरोप है। समिति निष्पक्ष जांच करेगी और सदन को अपनी राय सौंपेगी।
आप नेतृत्व ने इसे केंद्र प्रायोजित बताया, जबकि भाजपा ने इसे नियमों का पालन करार दिया। दिल्ली सरकार पानी, बिजली जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन सदन में यह घमासान ध्यान भटका रहा है।
पिछले वर्षों में ऐसे मामलों ने सस्पेंशन और विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था। समिति का फैसला विधायकों के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
अंततः, यह घटना दिल्ली विधानसभा की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने का अवसर है। पारदर्शिता और निष्पक्षता ही लोकतंत्र की बुनियाद हैं।