पहली तिमाही में जीडीपी 8.2 प्रतिशत की छलांग लगाकर वैश्विक पटल पर भारत को चमकाया। भाजपा ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में मील का पत्थर बताया। वित्त मंत्री कार्यालय ने कहा, ‘पीएलआई योजना, गति शक्ति और निर्यात वृद्धि ने ये संभव किया।’ औपचारिक रोजगार सृजन रिकॉर्ड स्तर पर है।
विपक्ष ने तीखा प्रहार किया। ‘ये मृत अर्थव्यवस्था है, जो कर्ज और प्रचार पर टिकी है,’ राहुल गांधी ने चुटकी ली। बेरोजगारी 9 प्रतिशत, किसान आय स्थिर और महंगाई ने आम आदमी को परेशान किया। टीएमसी और अन्य ने आंकड़ा जालसाजी का आरोप लगाया।
विश्लेषण से पता चलता है कि आईटी-पर्यटन में तेजी आई, लेकिन उद्योग धीमा। आईएमएफ ने 7 प्रतिशत विकास का पूर्वानुमान दोहराया, लेकिन मानसून जोखिमों की चेतावनी दी। कॉर्पोरेट जगत कर स्थिरता पर खुश, अडानी-टाटा जैसे समूह निवेश की घोषणा कर रहे।
उपचुनावों के मद्देनजर भाजपा क्रेडिट लेगी, तो विपक्ष ‘न्याय पत्र’ पर जोर देगा। सच्चाई ये है कि जीडीपी आंकड़े अच्छे हैं, लेकिन रसोई में भोजन और युवाओं को नौकरियां ही असल परीक्षा हैं। आने वाले बजट और फसलें कहानी तय करेंगी।