सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर लंबी सुनवाई सोमवार को समाप्त हो गई। बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया, जो न्यायिक नियुक्तियों और ट्रांसफर से जुड़े विवाद को हल करने वाला साबित हो सकता है।
याचिका में जस्टिस वर्मा ने केंद्रीय आदेशों को न्यायिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया है। वकीलों ने कोलेजियम सिफारिशों और कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर तीखी बहस की। बेंच ने संवैधानिक सिद्धांतों पर गहन चर्चा की।
याचिकाकर्ता पक्ष ने पूर्व फैसलों का जिक्र कर स्वायत्तता की रक्षा की मांग की। दूसरी ओर, केंद्र ने प्रशासनिक सुगमता का पक्ष रखा। सुनवाई में न्यायपालिका की भूमिका पर विस्तृत विश्लेषण हुआ। फैसला सुरक्षित होने से कानूनी हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। यह निर्णय हाईकोर्टों के ट्रांसफर नियमों को प्रभावित कर सकता है।