देश की प्रमुख शराब संघ आईएमपीपीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में ‘धुरंधर’ शराब पर लगे बैन को हटाने की फौरन कार्रवाई की मांग की है। पत्र में विस्तृत तथ्य पेश कर संघ ने स्थिति स्पष्ट की है।
‘धुरंधर’ अपनी जबरदस्त ताकत के कारण जीसीसी बाजारों का चहेता था, लेकिन नियामकीय बाधाओं से 2020 से निर्यात ठप हो गया। आईएमपीपीए ने बताया कि ब्रांड अब सभी जीसीसी मानकों पर खरा उतरता है, जिसमें पैकेजिंग और शुद्धता परीक्षण शामिल हैं। नुकसान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं—वार्षिक 500 करोड़ से अधिक।
यह ब्रांड भारतीय किसानों से कच्चा माल लेकर तैयार होता है और हजारों को रोजगार देता है। संघ ने सुझाव दिया कि राजनयिक स्तर पर बातचीत तेज की जाए। भारत-खाड़ी व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर चुका है, ऐसे में यह विवाद जल्द सुलझना चाहिए।
पत्र में प्रमाणिक दस्तावेज जोड़े गए हैं। उद्योग हलकों में आशावाद है कि पीएम के हस्तक्षेप से राहत मिलेगी। बैन हटने पर निर्यात में उछाल आएगा और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ेगी।
सरकार की सक्रियता से ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बल मिलेगा। आने वाले समय में यह मामला सफलता का प्रतीक बनेगा, जो अन्य क्षेत्रों के लिए उदाहरण सेट करेगा।