आवारा कुत्तों से हो रहे काटने के मामलों और दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी तंत्र की कमियों को उजागर किया। गुरुवार को इस मामले पर बहस आगे बढ़ेगी।
देश के प्रमुख शहरों में कुत्तों के हमलों से सैकड़ों लोग प्रभावित हो चुके हैं। रेबीज से मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। कोर्ट ने निगमों को नसबंदी कार्यक्रम तेज करने और वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बेंच ने राज्य सरकारों से जवाब तलब किया और कहा कि पशु कल्याण के नाम पर मानव सुरक्षा से समझौता नहीं हो सकता। एनजीओ और पशु चिकित्सकों की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
यह सुनवाई शहरी नियोजन और पशु प्रबंधन में नई दिशा देगी। गुरुवार के फैसले से केंद्रीय स्तर पर टास्क फोर्स गठन और फंडिंग की संभावना है, जो लाखों लोगों को राहत पहुंचाएगा।