मकर संक्रांति का त्योहार मुंडेश्वरी मंदिर को श्रद्धा और उल्लास से भर देता है। कैमूर की पहाड़ियों पर बसे इस पावन धाम पर लाखों भक्त दर्शन को पहुंचते हैं, जहां विशेष अनुष्ठान और भव्य मेला आयोजित होता है।
भोर होते ही हवन और अभिषेक पूजा शुरू हो जाती है। मंदिर का अष्टकोणीय गर्भगृह सुगंधित धूप-दीप से जगमगा उठता है। भक्त तिल-पत्ता चढ़ाते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं।
मेले का नजारा मनमोहक होता है। चाट-पकौड़े, गजक-रेवड़ी और पारंपरिक व्यंजनों की चहल-पहल रहती है। झूले, खेल-तमाशे और सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों व बड़ों को आकर्षित करते हैं।
पुराणों में वर्णित इस मंदिर की ऐतिहासिकता अद्भुत है। मां मुंडेश्वरी और शिव की जोड़ी तंत्र-मंत्र की साधना का केंद्र है। स्थानीय जनजातियां अपनी परंपराओं के साथ जुड़ती हैं।
सरकारी सहयोग से साफ-सफाई, यातायात और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होती है। रात्रि आरती के दीप प्रज्वलन से आकाश रोशन हो जाता है। यह उत्सव एकता और समृद्धि का संदेश देता है।