दमोह जिले में धुएं की मार से मुक्ति मिली है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण महिलाओं को नया जीवन प्रदान किया। परंपरागत चूल्हों की जगह एलपीजी ने ले ली, और इसके साथ आईं नई संभावनाएं।
तेंदूखेड़ा ब्लॉक की कमला देवी कहती हैं, ‘लकड़ी जुटाने से 4-5 घंटे बर्बाद होते थे। अब किराना दुकान चलाती हूं, रोज 300-400 कमाई। बेटी पढ़ाई पर ध्यान देती है।’ जिले में मासिक 18,000 रिफिल हो रहे।
आंकड़े प्रभावशाली हैं – वनों की कटाई 30% घटी, घरेलू प्रदूषण कम। लड़कियों की स्कूल उपस्थिति बढ़ी, महिलाओं की आय में उछाल। 95% उपयोग दर योजना की सफलता का प्रमाण।
निष्पादन में नवाचार है। मोबाइल रिफिल वैन, 800 रुपये सब्सिडी वाले सिलेंडर, जागरूकता अभियान। सरपंच रिफिल कैंप आयोजित कर रहे। यह कल्याण से कहीं अधिक, सामाजिक परिवर्तन है।
महिला स्वयं सहायता समूह बचत से उद्यम चला रहे। पोल्ट्री, हस्तशिल्प में निवेश। दमोह साबित करता है कि केंद्रित नीति सीमांत वर्गों को ऊपर उठा सकती है। पीएम मोदी का दृष्टिकोण साकार हो रहा।