संघीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने उर्दू विश्वविद्यालय को दिए गए नोटिस पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे नामंजूर ठहराया। तेलंगाना भाजपा प्रमुख ने सार्वजनिक मंच पर इसकी निंदा की और इसे उर्दू भाषा व संस्कृति के प्रति उपेक्षा का प्रतीक बताया।
यूजीसी द्वारा जारी नोटिस में वित्तीय प्रबंधन और नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं। संजय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह नोटिस बिना ठोस आधार के है और विश्वविद्यालय की प्रगति को बाधित करने की चाल है। उन्होंने उर्दू शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की।
विश्वविद्यालय के कार्यक्रम दूरस्थ शिक्षा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे हैं, जिससे कई युवा लाभान्वित हुए। संजय ने अन्य केंद्रीय संस्थानों में अनियमितताओं की अनदेखी का जिक्र कर दोहरा मापदंड उजागर किया। छात्रों और शिक्षकों ने एकजुट होकर नोटिस वापसी की मांग उठाई है।
यह विवाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहुलभाषी दृष्टिकोण के खिलाफ नजर आता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे से अल्पसंख्यक समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही। मंत्रालय की चुप्पी के बीच तनाव बढ़ रहा है, जो शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।