केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कृषि अवशेषों को राष्ट्रीय संपदा बनाने का खाका पेश किया। उनका कहना है कि फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को बर्बाद करने के बजाय बायो-सीएनजी, इथेनॉल और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल किया जाए।
उद्योग सम्मेलन में गडकरी ने आंकड़े पेश किए- 14 करोड़ टन पराली, चावल की भूसी, कपास की डंठल आदि से देश की 20 प्रतिशत ऊर्जा जरूरत पूरी हो सकती है। महाराष्ट्र में बगास से बिजली, पंजाब में इथेनॉल प्लांट सफल हो रहे हैं।
सरकार की योजनाएं जोर पकड़ रही हैं। 10 हजार करोड़ की योजना से बायो-सीएनजी उत्पादन को बढ़ावा। 2030 तक परिवहन ईंधन का 15 प्रतिशत कृषि अपशिष्ट से। बिहार के सहकारी समितियां पराली बेचकर किसानों को लाभ पहुंचा रही हैं।
जापानी तकनीक से सुपर मशीनें पराली को घंटों में तैयार करेंगी। राज्य सरकारों से जमीन और सब्सिडी की मांग। इससे 10 लाख नौकरियां, 5 अरब डॉलर की बचत।
गडकरी ने उत्साह से कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत का आधार बनेगा। किसान, उद्योग और पर्यावरण सबके हित में। अपशिष्ट अब बोझ नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत है।