कांग्रेस के इमरान मसूद ने एमसीडी की बुलडोजर कार्रवाई को निशाने पर लेते हुए पूछा, वक्फ एक्ट से पूर्व निर्मित मस्जिदें अवैध कैसे हो सकती हैं? यह सवाल न केवल तोड़फोड़ को चुनौती दे रहा है, बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बहस को तेज कर रहा है।
एमसीडी का अभियान अवैध अतिक्रमण हटाने का है, लेकिन कई ऐतिहासिक मस्जिदें इसके शिकार हुईं। मसूद ने कहा, ‘मुगल कालीन मस्जिदों को नष्ट करना इतिहास का अपमान है। कानून इनकी रक्षा करता है।’ प्रभावित समुदायों ने उनका साथ दिया।
वकीलों का मत है कि 1923 के मुसलमान वक्फ एक्ट पुरानी संपत्तियों को वैधता प्रदान करता है। वक्फ बोर्ड सर्वेक्षण करा रहा है, जबकि एमसीडी दावा करता है कि ये नए अतिक्रमण हैं। राजनीतिक तनाव बढ़ा है।
आप शासित एमसीडी पर विपक्ष ने हमला बोला, इसे अल्पसंख्यक विरोधी बताया। अदालतें पहले भी ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगा चुकी हैं। मसूद ने कानूनी लड़ाई का ऐलान किया।
दिल्ली की जनसंख्या वृद्धि और विकास की चुनौतियों के बीच यह विवाद संतुलन की मांग करता है। क्या एमसीडी रुकेगी या जारी रखेगी? मसूद की आवाज बदलाव की उम्मीद जगाती है।