बिहार में प्रशासनिक दरवाजे आम आदमी के लिए पूरी तरह खुले हो गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि जनता से मिलना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। अब कोई बहाना स्वीकार नहीं।
वरिष्ठ अधिकारियों को रोजाना दो घंटे जन सुनवाई के लिए देना होगा। निचले स्तर के कर्मचारी साप्ताहिक दरबार लगाएंगे। टोकन सिस्टम से भीड़ प्रबंधन होगा।
कुमार ने चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वालों को सस्पेंड किया जाएगा। यह आदेश उन तमाम शिकायतों का जवाब है जहां लोग घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटते थे।
गया और दरभंगा जैसे जिलों में बदलाव साफ दिख रहा है। महिलाएं, किसान और छोटे व्यापारी अब सीधे अधिकारियों तक पहुंच पा रहे हैं। एक महिला ने कहा, ‘मेरा जमीन विवाद तुरंत सुलझ गया।’
सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश का यह प्रयास उनकी पुरानी नीतियों का विस्तार है। डिजिटल हेल्पलाइन के साथ इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है।
विपक्ष ने स्वागत किया लेकिन पारदर्शिता की मांग की। अगर यह सफल रहा तो बिहार अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा। जनता की आवाज अब दबेगी नहीं।