राजधानी दिल्ली की विधानसभा में निलंबित आप विधायकों का प्रवेश नाकाम रहा। द्वार पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद विधायकों ने भाजपा पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया। घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
विधायक सुबह ही विधानसभा पहुंचे और कार्यालय खोलने की मांग की। उनका तर्क था कि निलंबन केवल सदन की कार्यवाही से रोकता है, कार्यालय जाने से नहीं। नारों के बीच सुरक्षाबल सक्रिय हो गए और प्रवेश असंभव कर दिया।
यह विवाद कई महीनों से चल रहा है जब सदन में हंगामे के कारण इन विधायकों को निष्कासित किया गया। आप का कहना है कि यह भाजपा का सुनियोजित षड्यंत्र है ताकि दिल्ली सरकार की आवाज दबाई जा सके। सदन अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन अनिवार्य है।
भाजपा ने आप के प्रयास को सस्ती लोकप्रियता का धंधा बताया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि विधायकों को सदन के मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए। आप ने इसके जवाब में आंदोलन तेज करने का वादा किया है।
दिल्ली चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह मुद्दा दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। निलंबित विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों पर काम न कर पाने की शिकायत कर रहे हैं। जनता का एक बड़ा वर्ग आप के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है। केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी के बीच यह घटना नई आग लगाने वाली है। आप विधायक हार मानने को तैयार नहीं, आगे संघर्ष जारी रहेगा।