हुबली में एक महिला के साथ पुलिस की कथित क्रूरता ने सनसनी फैला दी है। महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा आदिगे ने इसे संविधान के खिलाफ अपराध बताते हुए पुलिस की जमकर आलोचना की। उनके अनुसार, महिलाओं को सुरक्षा मिलना संवैधानिक बाध्यता है, जिसे कोई तोड़ नहीं सकता।
मामला तब सुर्खियों में आया जब पीड़ित महिला थाने में शिकायत दर्ज कराने गई। वहां मौजूद पुलिसवालों ने उल्टा उसके साथ धक्का-मुक्की की, अपशब्दों की बौछार की और डराने-धमकाने की कोशिश की। आदिगे ने कहा, ‘पुलिस संरक्षक बने या अपराधी? यह सवाल हर महिला के मन में है।’ उन्होंने संविधान के अनुच्छेदों का जिक्र कर अधिकारियों को याद दिलाया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिससे जनाक्रोश भड़क गया। कार्यकर्ता ने दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, विभागीय जांच के साथ-साथ मानवाधिकार आयोग की भूमिका की मांग की। स्थानीय महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं।
सरकार ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन राजनीतिक दलों ने बहस छेड़ दी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की है, मगर आदिगे इसे ‘आड़’ बता रही हैं। यह घटना पुलिस प्रशिक्षण और लैंगिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।
आदिगे का संदेश साफ है- सुधार जरूरी हैं। महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, वरना ऐसे कांड दोहराए जाएंगे। जांच के नतीजे न्याय की दिशा तय करेंगे।