लंबे समय की बीमारी ने मदन पूरी के करियर पर सवालिया निशान लगा दिया। काम पर लौटना चुनौतीपूर्ण रहा, जिसके चलते उन्होंने मुख्य किरदार छोड़ सहायक भूमिकाओं का दामन थाम लिया। उन्होंने खुद इसकी वजह बताई।
स्वास्थ्य समस्या ने उन्हें लंबे समय तक बंधे रखा। ठीक होने पर इंडस्ट्री ने उनका स्वागत ठंडा किया। ‘मुख्य भूमिकाओं के लिए स्टैमिना जरूरी था, जो तुरंत वापस नहीं आया,’ उन्होंने खुलकर कहा।
फिल्ममेकर्स ने सुरक्षित रास्ता चुना और उन्हें सपोर्टिंग रोल ऑफर किए। लेकिन मदन ने इन्हें पूरे जोश से निभाया। उनकी गंभीर आवाज और नजरों ने खलनायक के किरदारों को जीवंत कर दिया।
इस दौर में उन्होंने लगातार काम किया। बॉबी, डॉन जैसी ब्लॉकबस्टर्स में उनके योगदान ने उन्हें चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
मदन पूरी का अनुभव बॉलीवुड की कठोर वास्तविकताओं को उजागर करता है। फिर भी उनकी जज्बा भरी वापसी प्रेरणादायक है, जो सिखाती है कि लचीलापन ही असली ताकत है।