प्रियंका चतुर्वेदी ने जेएनयू में हो रही नारेबाजी को अनुचित ठहराते हुए कहा कि ‘इस तरह की नारेबाजी जेएनयू में स्वीकार्य नहीं।’ शिवसेना नेता का यह बयान परिसर की अराजकता पर ब्रेक लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हाल के विरोधों में छात्रों द्वारा लगाए गए विवादास्पद नारों ने सोशल मीडिया से लेकर संसद तक हंगामा मचा दिया। चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में असहमति जायज है, मगर राष्ट्र-विरोधी बयानबाजी नहीं।
उन्होंने कहा, ‘शिक्षण संस्थानों को वैचारिक जंग का मैदान नहीं बनना चाहिए।’ जेएनयू के पूर्व घटनाक्रम—जैसे देशद्रोह के आरोप और फीस वृद्धि आंदोलन—इस संदर्भ को और गहरा बनाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चतुर्वेदी का बयान उनकी पार्टी की राष्ट्रवादी छवि को मजबूत करेगा। छात्र संगठनों पर नकेल कसने की मांग तेज हो रही है, जिसमें कोटा सिस्टम और सेंट्रल एजेंसी की भूमिका शामिल है।
अंततः, यह मुद्दा शिक्षा नीति पर बहस छेड़ता है। प्रियंका चतुर्वेदी की अपील छात्रों से है कि वे संवाद के रास्ते चुनें, ताकि जेएनयू अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रख सके। देश एकता की उम्मीद इसी से बंधी है।