हाजी अरफात शेख ने जेएनयू को आड़े हाथों लेते हुए एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जो पूरे शैक्षिक जगत को हिला रहा है। रैली में उन्होंने कहा, ‘जेएनयू में छात्र शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं या आतंक के बीज बोने?’ यह बयान तूफान ला चुका है।
अतीत की घटनाओं जैसे सीएए विरोध, कश्मीर समर्थन और विवादित सेमिनारों का जिक्र करते हुए शेख ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र-विरोधी तत्वों का केंद्र बन गया है। ‘सरकारी फंडिंग का दुरुपयोग हो रहा है,’ उन्होंने चेतावनी दी और राष्ट्रीयता आधारित सुधारों की मांग की।
समर्थकों ने इसे स्वागतयोग्य बताया, जबकि आलोचकों ने हेट स्पीच करार दिया। जेएनयू में विरोध प्रदर्शन की तैयारी हो रही है। विपक्षी दल भी मैदान में हैं।
यह मुद्दा शिक्षा नीति पर बहस को नई दिशा दे सकता है। क्या जेएनयू में बदलाव आएंगे? शेख का बयान एक नया अध्याय लिख रहा है।