प्रख्यात कमेंटेटर सनी धीमान ने न्याय व्यवस्था पर करारा हमला बोला है। उनका दावा है कि भारत में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए न्याय के दो मापदंड हैं। ‘देश में न्याय की दो आंखें हैं’ – यह उनका वायरल बयान बन चुका है। वीडियो में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर तुलना पेश की।
मुस्लिम याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई और आदेश जारी होते हैं, चाहे वक्फ जमीन का मामला हो या धार्मिक स्थल विवाद। वहीं हिंदू पक्ष को मंदिर सर्वे या ऐतिहासिक स्थलों की लड़ाई में वर्षों इंतजार करना पड़ता है। ग्यानवापी, शाही ईदगाह जैसे केस इसका उदाहरण हैं। धीमान ने कहा, ‘समानता का दावा खोखला है।’
यह मुद्दा तब गरमाया जब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। समर्थक धीमान को सच्चाई का आईना मानते हैं, विरोधी इसे भड़काऊ बताते हैं। वकील संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। चुनावी माहौल में यह राजनीतिक रंग भी ले सकता है।
धीमान की अपील है कि न्याय सबके लिए एकसमान हो। देश की एकता इसी पर टिकी है। क्या सुप्रीम कोर्ट इस आलोचना पर संज्ञान लेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि केस मैनेजमेंट में बदलाव जरूरी। धीमान का वीडियो बहस को नई दिशा दे रहा है, जो न्यायपालिका के लिए परीक्षा बन सकती है।