आंध्र प्रदेश के केजी बेसिन में स्थित एक कुएं से गैस रिसाव की घटना पर ओएनजीसी ने नियंत्रण योजना को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी। अक्टूबर मध्य से जारी यह रिसाव नियामकों और स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा था।
विशेषज्ञों की समीक्षा और वैश्विक सलाह के बाद डायनामिक किल तकनीक पर आधारित रणनीति बनी। इसमें सटीक द्रव इंजेक्शन, यांत्रिक बैरियर और डायग्नोस्टिक जांच शामिल हैं।
‘इस योजना की खासियत इसकी बहुस्तरीय सुरक्षा है,’ प्रोजेक्ट प्रमुख ने कहा। आरओवी से पानी के नीचे जांच होगी, जो जोखिम कम करेगी। राहत कुआं खुदने की योजना भी तैयार है।
पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियां सामने आई हैं। अब तक कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन फ्लेयर स्टैक से गैस जल रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय और प्रदूषण बोर्ड के साथ समन्वय है। आसपास के कुओं का उत्पादन सामान्य है। 10-15 दिनों में अभियान चलेगा।
यह पारदर्शिता के लिए लाइव स्ट्रीमिंग के साथ होगा। ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में ओएनजीसी की भूमिका मजबूत हुई है।