ओडिशा हाईकोर्ट ने एक छोटी बच्ची के साथ बलात्कार और उसके बाद हत्या के अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को फांसी की सजा का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह निर्णय 150 पन्नों के विस्तृत फैसले के बाद आया, जिसमें सभी दलीलों को खारिज कर दिया गया।
घटना उस दिन घटी जब आरोपी ने स्कूल से लौट रही 12 वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर ले गया। रात भर चली विभीषिका के बाद उसका शव जंगल में फेंक दिया गया। ऑटोप्सी में दुष्कर्म और गला घोंटने के निशान मिले।
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और गवाहों के आधार पर आरोपी को पकड़ा। मुकदमे में केमिकल विश्लेषण और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट ने अपराध की पुष्टि की। अदालत ने कहा कि आरोपी की सामाजिक पृष्ठभूमि कोई छूट का आधार नहीं बन सकती।
कोर्ट रूम में सजा सुनते ही पीड़ित मां की आहें निकलीं। बाहर प्रदर्शनकारी न्याय की मांग कर रहे थे। यह फैसला पीओसीएसओ कानून के सख्त प्रावधानों को मजबूत करता है। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने का वादा किया है।
अपील की गुंजाइश बाकी है, लेकिन यह सजा अपराधियों के लिए चेतावनी है। ओडिशा में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई पहल शुरू हो सकती हैं। न्याय मिला तो सही, लेकिन खोई जिंदगी कभी वापस नहीं आएगी।