गोरखनाथ धाम के खिचड़ी मेले ने एक बार फिर गोरखपुर को आस्था और उल्लास से सराबोर कर दिया। यह आयोजन भक्ति, हास्य-विनोद और जीविका के अद्भुत मिश्रण का प्रतीक है। स्वादिष्ट खिचड़ी प्रसाद भक्तों के दिलों को छू रहा है।
परिसर में मनोरंजन के अनगिनत साधन हैं। कठपुतली शो, जादूगरों के करतब, मेले के झूले सबको लुभा रहे। संगीत और नाटकों से रातें जागरण भरी हो जाती हैं। खान-पान के स्टॉलों पर पारंपरिक व्यंजन लजीज लग रहे।
रोजगार के अवसरों की भरमार है। हजारों मजदूर, दुकानदार और उत्पादक अपनी कमाई कर रहे। डिजिटल पेमेंट और कौशल प्रशिक्षण से मेले को आधुनिक रूप मिला। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही।
कोविड नियमों का सख्ती से पालन हो रहा। ट्रैफिक प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाएं चाक-चौबंद हैं। यह मेला गोरखनाथ महाप्रभु की महिमा का जीवंत प्रमाण है, जो समग्र विकास की प्रेरणा देता है।