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    Home»India»प्रलय मिसाइल अब पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’: INDIGIS का हुआ सफल एकीकरण
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    प्रलय मिसाइल अब पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’: INDIGIS का हुआ सफल एकीकरण

    Indian SamacharBy Indian SamacharDecember 16, 20253 Mins Read
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    नई दिल्ली: भारत अपनी रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को और मजबूत कर रहा है। स्वदेशी ‘प्रलय’ सामरिक मिसाइल प्रणाली में अब इंडिजिनस जियोोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (INDIGIS) को सफलतापूर्वक एकीकृत कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण विकास सुनिश्चित करता है कि प्रलय मिसाइल अपने ऑपरेशनल प्लानिंग, हार्डवेयर, और मिसाइल गाइडेंस के हर पहलू के लिए पूर्णतः भारतीय तकनीक पर निर्भर होगी, विदेशी सॉफ्टवेयर से मुक्ति मिलेगी।

    रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR) द्वारा विकसित INDIGIS, प्रलय मिसाइल के मिशन प्लानिंग से लेकर लॉन्च तक की पूरी प्रक्रिया को भारतीय नियंत्रण में लाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की सामरिक स्वतंत्रता की दिशा में एक युगांतरकारी उपलब्धि है।

    **युद्धक्षेत्र की सटीक मैपिंग और संचालन**

    इस स्वदेशी एकीकरण का सबसे बड़ा फायदा मिसाइल बटालियन कमांडरों को होगा। अब वे एक सुरक्षित, ऑफलाइन और मजबूत डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर पाएंगे। यह प्लेटफॉर्म लॉन्चर्स की सटीक लोकेशन, मिसाइल के विभिन्न वेरिएंट्स, टारगेट की जानकारी, रेंज की सीमाएं और अन्य आवश्यक युद्धक्षेत्र डेटा को एक ही इंटरफेस पर प्रदर्शित करेगा।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिस्टम किसी भी विदेशी सॉफ्टवेयर या लाइव सैटेलाइट कनेक्शन पर निर्भर नहीं है। इससे डेटा लीक होने, हैकिंग या युद्धकाल में सेवा बाधित होने का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) के माहौल में भी मिशन प्लानिंग और एग्जीक्यूशन निर्बाध रूप से जारी रखा जा सकता है।

    **फर्स्ट-स्ट्राइक क्षमता में वृद्धि**

    पहले, भारतीय सैन्य प्रणालियों में अक्सर विदेशी जीआईएस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता था। प्रलय मिसाइल, जिसे युद्ध की प्रारंभिक अवस्था में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है, के लिए ऐसी निर्भरता चिंता का विषय थी। इसी को ध्यान में रखते हुए, सशस्त्र बलों और डीआरडीओ ने एक पूरी तरह से स्वदेशी समाधान विकसित करने पर जोर दिया।

    डीआरडीओ ने व्यापक परीक्षणों के बाद, INDIGIS को बेंगलुरु की कंपनी माइक्रोजेनेसिस टेकसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा, जिसने इसे प्रलय मिसाइल के लिए विशिष्ट रूप से अनुकूलित किया। अब इकाइयाँ इस डेस्कटॉप जीआईएस प्लेटफॉर्म का उपयोग करके युद्धक्षेत्र का तेजी से और अत्यधिक सटीकता के साथ विश्लेषण कर सकती हैं तथा युद्ध योजनाएं तैयार कर सकती हैं।

    **गतिशील और सुरक्षित मिसाइल संचालन**

    प्रलय मिसाइल 150-500 किमी की दूरी तक मार करने में सक्षम है और अपनी उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जाता है जो लगातार अपनी जगह बदलते हैं, ‘शूट-एंड-स्कूट’ रणनीति का पालन करते हैं।

    इस प्रकार के ऑपरेशन के लिए, कमांडरों को लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म की लोकेशन, विभिन्न वारहेड्स के लिए आवश्यक रेंज, दुश्मन के रडार और तोपखाने से बचने के लिए इलाके का उपयोग, और हमले के बाद सुरक्षित निकलने के रास्तों की तत्काल जानकारी चाहिए होती है। INDIGIS इन सभी जरूरतों को पूरा करता है, यहाँ तक कि सैटेलाइट संचार जाम होने की स्थिति में भी यह सिस्टम विश्वसनीय बना रहता है।

    **रणनीतिक सुरक्षा में एक मील का पत्थर**

    INDIGIS के प्रलय मिसाइल में एकीकरण से भारत ने एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। अब हमारे पास एक पूर्णतः स्वदेशी अर्ध-बलिस्टिक मिसाइल है, जो स्वदेशी गाइडेंस सिस्टम द्वारा संचालित है और जिसकी मिशन प्लानिंग भी पूरी तरह से घरेलू जीआईएस प्लेटफॉर्म पर आधारित है। यह परिदृश्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत की मिसाइल क्षमताएं न केवल शक्तिशाली हैं, बल्कि तकनीकी रूप से भी पूर्णतः स्वतंत्र हैं।

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