भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। पिछले तीन दिनों में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिसके कारण यात्री जगह-जगह फंस गए हैं। क्रू सदस्यों की कमी और तकनीकी दिक्कतों के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर शुक्रवार को इंडिगो की चार उड़ानें रद्द हुईं और तीन में देरी हुई। इसी तरह, दिल्ली, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में भी उड़ानों के रद्द होने और देरी की खबरें हैं। इस अव्यवस्था के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्रियों को तत्काल यात्रा के लिए दूसरी एयरलाइनों में बहुत ऊंचे दामों पर टिकट खरीदने पड़ रहे हैं, जो ₹20,000 से ₹30,000 तक पहुंच गए हैं। कुछ यात्रियों को तो 10-12 घंटे तक फंसे रहने और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने की शिकायतें भी हैं। गुरुवार को अकेले इंडिगो ने 550 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जो एयरलाइन के इतिहास में एक दिन में रद्द उड़ानों की सबसे बड़ी संख्या है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, इंडिगो ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से 10 फरवरी 2026 तक के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के कुछ प्रावधानों में छूट मांगी है। एयरलाइन ने DGCA को भरोसा दिलाया है कि वह समस्या के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है और जल्द ही संचालन सामान्य हो जाएगा। इंडिगो ने DGCA को यह भी आगाह किया है कि अगले कुछ दिनों में और भी उड़ानें रद्द की जा सकती हैं, ताकि मौजूदा परिचालन संबंधी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके। DGCA इस स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और एयरलाइन से उम्मीद करता है कि वह 10 फरवरी 2026 तक सामान्य स्थिति बहाल कर देगी। नागर विमानन मंत्री ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है और फंसे हुए यात्रियों को सहायता प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं। DGCA ने एयरलाइन को चेताया है कि वह यात्रियों की इस मजबूरी का फायदा उठाकर किराया न बढ़ाए।
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