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    Home»India»चंडीगढ़ का भविष्य दांव पर? पंजाब के राजनीतिक दल लामबंद
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    चंडीगढ़ का भविष्य दांव पर? पंजाब के राजनीतिक दल लामबंद

    Indian SamacharBy Indian SamacharNovember 23, 20252 Mins Read
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    पंजाब की राजनीति में उस समय उबाल आ गया जब केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 240 के अंतर्गत लाने की अपनी मंशा जाहिर की। इस प्रस्ताव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां प्रमुख दलों ने इसे पंजाब के हितों के खिलाफ एक बड़ी चाल बताया है।

    संसद में पेश होने वाले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य चंडीगढ़ के प्रशासन पर राष्ट्रपति को प्रत्यक्ष अधिकार देना है। सूत्रों के अनुसार, यह विधेयक आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा, जिससे चंडीगढ़ का पंजाब के साथ प्रशासनिक जुड़ाव समाप्त हो सकता है, जो दशकों से चला आ रहा है।

    अनुच्छेद 240 क्या कहता है?

    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 240, राष्ट्रपति को कुछ विशेष केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा और नागर हवेली, दमन और दीव, और पुडुचेरी के प्रशासन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है। चंडीगढ़ वर्तमान में इस सूची में शामिल नहीं है।

    1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद चंडीगढ़ को एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में विकसित किया गया था और यह पंजाब व हरियाणा की संयुक्त राजधानी है। पंजाब के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी स्थापना के लिए पंजाब के गांवों का अधिग्रहण किया गया था।

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह पंजाब की राजधानी को “छीनने की साजिश” है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “चंडीगढ़ हमेशा पंजाब का था, है और रहेगा। हमारे लोगों ने इसे बसाने के लिए अपनी जमीन दी। हम इसके लिए लड़ने को तैयार हैं।”

    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे “पंजाब के अधिकारों पर हमला” करार दिया। उन्होंने कहा, “जिस पंजाब ने देश के लिए इतना बलिदान दिया है, उसे उसकी राजधानी से वंचित करना गलत है। चंडीगढ़ पंजाब का गौरव है।”

    पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इस पहल को “गलत” और “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि “इसके गंभीर परिणाम होंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि चंडीगढ़ के दर्जे में किसी भी बदलाव का “जोरदार विरोध” किया जाएगा।

    शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने भी इस “पंजाब विरोधी” विधेयक के खिलाफ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है। उन्होंने इसे “संघीय ढांचे पर एक सीधा हमला” बताते हुए कहा कि “चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा अटूट है और इसे किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा।”

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