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    Home»India»पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची सुधार: बांग्लादेशी प्रवासियों का पलायन और ममता का विरोध
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    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची सुधार: बांग्लादेशी प्रवासियों का पलायन और ममता का विरोध

    Indian SamacharBy Indian SamacharNovember 21, 20255 Mins Read
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    पश्चिम बंगाल में इन दिनों चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया राज्य में विवादों और चिंताओं का एक बड़ा कारण बन गई है। जहां एक ओर चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने का काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य से ऐसे समाचार आ रहे हैं कि सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी प्रवासी, जिनके पास कथित तौर पर पहचान के दस्तावेज जैसे आधार कार्ड और वोटर आईडी भी हैं, भारत छोड़कर बांग्लादेश लौट रहे हैं। यह घटनाक्रम राज्य के कुछ इलाकों में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रहा है।

    जिन लोगों ने पलायन किया है, उनमें से अधिकांश वे लोग हैं जो बांग्लादेश से आकर पश्चिम बंगाल में बस गए थे और कबाड़ी का काम करते थे। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि मतदाता सूची का यह संशोधन राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के समान ही कोई कार्रवाई हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें देश से निकाला जा सकता है। विशेष रूप से उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम जैसे इलाकों से ऐसे पलायन की खबरें सामने आ रही हैं।

    इस अप्रत्याशित पलायन के बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत के चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। उन्होंने गुरुवार को भेजे गए इस पत्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर अपनी गंभीर आपत्तियों को दर्ज कराया है और आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री ने इस पूरी कवायद को “अव्यवस्थित, अराजक और खतरनाक” बताते हुए इसकी कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण की कमी और दस्तावेज़ों की आवश्यकताओं में अस्पष्टता पर सवाल उठाए हैं।

    ममता बनर्जी ने एक ट्वीट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान प्रकाश को संबोधित अपने पत्र को साझा करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के निष्पादन में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की कमी, आवश्यक दस्तावेज़ीकरण पर स्पष्टता का अभाव और लोगों के काम-काज के व्यस्ततम समय में उनसे मुलाकात करने की असंभवता ने इस पूरी प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह से इस प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है, वह अव्यवस्थित, अराजक और खतरनाक साबित हो रही है। उचित योजना और स्पष्ट संवाद की कमी ने शुरुआत से ही प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया है।

    मुख्यमंत्री ने पत्र में बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर पड़ रहे भारी दबाव का भी ज़िक्र किया है। उन्होंने कहा कि BLOs को ऑनलाइन डेटा एंट्री, सर्वर से जुड़ी दिक्कतों और अपर्याप्त प्रशिक्षण से जूझना पड़ रहा है, जिससे मतदाता सूची की सटीकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि BLOs अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए (उनमें से कई शिक्षक और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में कार्यरत हैं) घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने और जटिल ऑनलाइन फॉर्म भरने जैसे कार्यों को संभाल रहे हैं। प्रशिक्षण की कमी, सर्वर की समस्या और डेटा में लगातार आ रही विसंगतियों के चलते वे काम को सही ढंग से पूरा करने में असमर्थ हैं।

    मुख्यमंत्री बनर्जी ने आगाह किया है कि SIR प्रक्रिया की इन खामियों के कारण “वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से कट सकते हैं, मतदाता सूची की पवित्रता भंग हो सकती है, और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुँच सकता है”। उन्होंने आशंका जताई कि वर्तमान गति को देखते हुए 4 दिसंबर तक विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता डेटा को सही ढंग से अपलोड करना संभव नहीं होगा। इससे भी बदतर स्थिति यह है कि कई BLOs पर अत्यधिक दबाव है और वे किसी भी तरह की सज़ा से बचने के लिए गलत या अधूरी जानकारी दर्ज करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे असली मतदाताओं के मताधिकार पर खतरा मंडरा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि SIR की यह प्रक्रिया ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम बंगाल में कृषि कार्य अपने चरम पर है। धान की कटाई का काम मध्य दिसंबर 2025 तक चलेगा, और साथ ही आलू जैसी रबी फसलों की बुवाई का महत्वपूर्ण समय भी है। ऐसे में लाखों किसान और खेतिहर मजदूर अपने खेतों में व्यस्त हैं और उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे SIR गणना के लिए अपना काम छोड़कर भाग लें।

    पत्र में एक अत्यंत दुखद घटना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें माल, जलपाईगुड़ी की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जो BLO के रूप में भी कार्यरत थी, कथित तौर पर SIR से संबंधित अत्यधिक दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से कई अन्य लोगों की भी जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिस मतदाता सूची संशोधन कार्य को पूरा होने में पहले तीन साल लगते थे, उसे अब तीन महीने में जबरन पूरा करने का दबाव है, जिसके कारण BLOs और अधिकारियों को अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है और आम लोग भय और अनिश्चितता में जी रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने, इस प्रक्रिया को फिलहाल रोकने, BLOs को आवश्यक सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने, तथा चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी कार्यप्रणाली और समय-सीमा का पुनर्मूल्यांकन करने का आग्रह किया है।

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