फरीदाबाद पुलिस ने दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए हालिया धमाके के संबंध में अल-फलाह विश्वविद्यालय की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की है। यह कदम तब उठाया गया है जब यह संदेह जताया जा रहा है कि इस विश्वविद्यालय का एक आतंकी मॉड्यूल से संबंध हो सकता है। यह एसआईटी इस बात की पड़ताल करेगी कि कैसे संदिग्ध व्यक्तियों ने विश्वविद्यालय परिसर का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए किया और वे स्थानीय पुलिस की नजरों से कैसे बचते रहे।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी में दो सहायक पुलिस आयुक्त, एक इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। इस दल का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के अंदरूनी तंत्र, वित्तीय प्रवाह और उन गुप्त नेटवर्कों की पहचान करना है, जिनके माध्यम से आरोपियों को विश्वविद्यालय में संचालन करने की सुविधा मिली। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या विश्वविद्यालय के भीतर ऐसे लोग थे जिन्होंने आरोपियों की मदद की।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में यह समझना शामिल है कि विस्फोटकों को कहां से और कैसे प्राप्त किया गया, उन्हें कहां छुपाया गया, और फरीदाबाद से दिल्ली तक बिना किसी बाधा के कैसे ले जाया गया। एसआईटी इस संभावना की भी जांच कर रही है कि क्या विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था में खामियां थीं या फिर किसी बाहरी तत्व का हाथ था, जिसने आतंकी समूह को वर्षों तक छिपने में मदद की।
फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर, सतेंद्र कुमार गुप्ता, ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह विश्वविद्यालय के माहौल का गहन अध्ययन करे और इस बात का पता लगाए कि कैसे इस तरह के गुप्त समूह वहां सक्रिय रह सके। प्रगति रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी।
अल-फलाह विश्वविद्यालय पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा में है। अधिकारी एक ओर जहां दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार विस्फोट में इसकी संभावित संलिप्तता की जांच कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी मान्यता प्राप्त करने के गंभीर आरोप भी लगे हैं।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब यह पता चला कि 10 नवंबर के कार बम धमाकों का मुख्य आरोपी, डॉ. उमर मोहम्मद, और उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य व्यक्ति अल-फलाह विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से जुड़े हुए थे।
10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला के पास एक कार में हुए भीषण विस्फोट में 15 से अधिक लोगों की जान गई थी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस घटना को आतंकी हमला मानते हुए केंद्र सरकार ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है।
