गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने अपना दसवां कार्यकाल शुरू किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजग (NDA) के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस नए मंत्रिमंडल में सबसे खास रहा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री बनना। दीपक प्रकाश ने हालिया विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लिया था, इसके बावजूद उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया है।
**एक जानी-मानी राजनीतिक हस्ती:**
दीपक प्रकाश का ताल्लुक बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से है। उनके पिता, उपेंद्र कुशवाहा, राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे राज्यसभा सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रह चुके हैं। उनकी माता, स्नेह लता कुशवाहा, ने हाल ही में सासाराम विधानसभा सीट से शानदार जीत दर्ज की, जहां उन्होंने राजद प्रत्याशी को बड़ी हार दी।
**मंत्री बनने का समीकरण:**
शुरुआत में, ऐसी चर्चाएं थीं कि स्नेह लता को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। लेकिन, राजग के भीतर हुई रणनीतिक चर्चाओं और उपेंद्र कुशवाहा के राजनीतिक कद को देखते हुए, यह फैसला लिया गया कि दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया जाएगा। यह उनके राजनीतिक करियर की एक नई शुरुआत है। नियमानुसार, दीपक प्रकाश को अगले छह महीने में बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। ऐसी खबरें हैं कि उन्हें जल्द ही विधान परिषद भेजा जा सकता है।
**जातिगत समीकरणों का खेल:**
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दीपक प्रकाश की मंत्रिमंडल में एंट्री राजग के लिए महत्वपूर्ण लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) वोट बैंक को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही इस समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, और इस नियुक्ति से यह सुनिश्चित हुआ है कि इस समुदाय का प्रतिनिधित्व सरकार में बना रहे।
**कुशवाहा परिवार का बढ़ता प्रभाव:**
दीपक के मंत्री बनने से कुशवाहा परिवार का राजनीतिक कद और मजबूत हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट से हार के बाद, उपेंद्र कुशवाहा को राजग के समर्थन से राज्यसभा पहुंचाया गया। स्नेह लता की हालिया विधानसभा जीत ने परिवार की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। अब उनके बेटे का मंत्री बनना, परिवार के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने राजग के साथ मिलकर हुए सीट बंटवारे में छह सीटों पर चुनाव लड़ा और चार पर जीत हासिल की, जो उपेंद्र कुशवाहा के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उपेंद्र कुशवाहा का राजनीतिक करियर कई मोर्चों पर लड़खड़ाया है, जिसमें 2019 में महागठबंधन के साथ चुनाव लड़कर हारना, 2020 में अकेले चुनाव मैदान में उतरना और बुरी तरह हारना, 2021 में जद(यू) में विलय, और फिर 2023 में RLM बनाकर राजग की ओर लौटना शामिल है। लोकसभा चुनावों में मिले झटके के बावजूद, 2025 के विधानसभा चुनाव नतीजों ने उनकी राजनीतिक राह फिर से खोल दी है और उनके परिवार को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
