तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय द्वारा आयोजित राजनीतिक रैली में भगदड़ में 40 लोगों की दुखद मौत के बाद राजनीति गरमा गई है। डीएमके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अभिनेता विजय को इस घटना के लिए दोषी ठहराया है और एक-सदस्यीय न्यायिक जांच का आदेश दिया है। विजय ने इस जांच को खारिज करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ने सुरक्षा प्रदान करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में लापरवाही बरती, साथ ही रैली की अनुमति में भी देरी की गई। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने इस मामले में गलत कदम उठाया है। उन्होंने रैली स्थल से जाने का फैसला किया, जबकि अन्य राजनेता पीड़ितों से मिल रहे थे। टीवीके का कहना है कि सरकार ने उन्हें घटनास्थल छोड़ने की सलाह दी थी, जबकि सरकार ने इसका खंडन किया है। यदि यह कहानी सच होती है, तो विजय तमिलनाडु की राजनीति में ‘मृत’ हो सकते हैं। एक-सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट इस मामले में राजनीति की दिशा तय करेगी। विजय और टीवीके सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, जिसका समर्थन बीजेपी भी कर रही है। पुलिस और प्रशासन ने विजय और उनकी पार्टी के आरोपों का खंडन किया है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था में चूक और रैली की अनुमति में देरी शामिल है। बीजेपी, जो एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है, ने डीएमके सरकार पर आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पूर्व टीएन बीजेपी प्रमुख के अन्नामलाई ने राज्य सरकार और डीएमके को दोषी ठहराया। चुनाव मई 2026 में होने हैं, ऐसे में सभी पक्ष इस त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। डीएमके फिलहाल विपक्षी दलों के बीच मतभेद से लाभान्वित हो रही है, लेकिन उसे विपक्ष के बीच चुनावी समझौते की संभावना की चिंता है।
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