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    Home»India»आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: काटने के मामले और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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    आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: काटने के मामले और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    Indian SamacharBy Indian SamacharAugust 22, 20253 Mins Read
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    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में आवारा कुत्तों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं जबकि कई इसका विरोध कर रहे हैं, खासकर डॉग लवर्स। वे नहीं चाहते कि इन बेजुबानों को आश्रय गृहों में भेजा जाए। दूसरी तरफ, कुत्तों के हमलों से परेशान लोग हैं, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मामले बढ़े हैं।

    भारत में आवारा कुत्तों की संख्या पर अलग-अलग आंकड़े हैं। 2019 में पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, 1.6 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते थे। Pet Homelessness Index of India की रिपोर्ट में यह संख्या 6.2 करोड़ बताई गई थी।

    कुत्तों के काटने के मामले भी बढ़े हैं। 2024 में, 37 लाख मामले सामने आए, जिनमें से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों से थे। पिछले साल 54 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर रेबीज से हुई थी।

    2022 और 2023 में, यह आंकड़ा क्रमशः 22 लाख और 23 लाख था। इस साल जनवरी में ही, 430,000 मामले दर्ज किए गए। केंद्र सरकार ने अप्रैल में इसकी जानकारी दी। इस साल 37 लोगों की मौत हुई। पिछले चार सालों में, हर साल 23 लाख मामले सामने आए हैं।

    इसका मतलब है कि हर दिन लगभग 6369 लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। दिल्ली-एनसीआर में करीब 8 लाख आवारा कुत्ते हैं। पिछले साल दिल्ली में 25,000 से अधिक मामले सामने आए थे।

    आवारा कुत्तों के आक्रामक होने के कई कारण हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में हमले बढ़े हैं। 2020 के लॉकडाउन के दौरान, कुत्तों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी आक्रामकता बढ़ी।

    अन्य कारण:

    * भोजन की कमी से कुत्ते आक्रामक होते हैं।
    * प्रजनन के दौरान आक्रामकता।
    * बच्चों या अजनबियों द्वारा उकसाने पर हमला।
    * अजनबियों या अन्य जानवरों को देखकर आक्रामकता।
    * पत्थर मारना, पीटना या डराना।
    * बीमारियां और चोटें।

    डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 20,000 लोग रेबीज से मरते हैं, जिनमें से 95% से अधिक मामले आवारा कुत्तों के काटने से होते हैं। इसका मतलब है कि हर दिन 54-55 लोग रेबीज से मर रहे हैं। आवारा कुत्तों के हमलों से गंभीर चोटें लगती हैं, लेकिन मौतें रेबीज को छोड़कर कम होती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम्स में भेजने का आदेश दिया। इस आदेश पर बहस छिड़ गई। कई याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन अदालत ने आदेश को स्थगित करने से इनकार कर दिया और 22 अगस्त को फैसला सुनाएगी।

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