शरीर की सात धातुओं में रस धातु आधारभूत है, जो पके भोजन के रस से बनती है। यह ऊर्जा का स्रोत बनकर कोशिकाओं को पोषित करती है और शरीर को ओजस्वी बनाए रखती है। हृदय से लेकर त्वचा तक फैली यह धातु संतुलन में रहकर रोगों से बचाव करती है।
कफ की अधिकता से इसका संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे प्यास का बार-बार लगना, मुंह का शुष्क होना, कमजोरी, अपच, रक्तदोष और सूजन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं।
उपचार सरल है- अनार, पपीता, सेब व नींबू जैसे फलों से रस धातु की पूर्ति करें। जीरे का पानी detox करता है, जबकि नारियल पानी हाइड्रेशन प्रदान करता है।
आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस धातु को मजबूत बनाएं। डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है, जो दोष अनुसार दवाएं सुझाएंगे। स्वस्थ रस धातु से पूर्णतः स्वस्थ जीवन संभव है।