आधुनिक जीवनशैली ने लोगों को रोगों की चपेट में ला दिया है। शारीरिक सुप्तता, अनियमित भोजन और मानसिक दबाव से रीढ़ कमजोर हो रही है, पेट खराब हो रहा है। योग के माध्यम से इनसे निपटा जा सकता है। पश्चिमोत्तानासन एक ऐसा आसन है जो रीढ़ को मजबूती देता है, आंतों को सक्रिय बनाता है और तनाव को जड़ से मिटाता है।
इसके अभ्यास से पीठ दर्द दूर होता है, हैमस्ट्रिंग लचीले बनते हैं, पेट की अतिरिक्त चर्बी पिघलती है। यह चिंता, सिरदर्द और थकान के लिए रामबाण है। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी परेशानियां भी कम होती हैं।
अभ्यास के लिए सीधे पैरों को आगे फैलाकर बैठें। सांस भरकर हाथ ऊपर ले जाएं, रीढ़ खींचें। सांस छोड़कर आगे झुकें, अंगूठे पकड़ें। शरीर के पिछले भाग में खिंचाव महसूस होगा। 20-60 सेकंड रुकें, फिर सामान्य मुद्रा में लौटें।
सबसे उत्तम समय प्रातःकाल का है, जब पेट खाली हो। इससे चयापचय तेज होता है। संध्या में भी संभव है, लेकिन खाने के बाद इंतजार करें। नौसिखियों को प्रशिक्षक के सान्निध्य में करना चाहिए।
यह आसन न केवल शारीरिक लाभ देता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी लाता है। नियमितता से जीवन ऊर्जावान हो जाता है। योग को अपनाएं, स्वास्थ्य को संवारे।