ऑटोइम्यून विकार सीलिएक रोग में ग्लूटेन आंतों पर हमला बोलता है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली ठप हो जाती है। पोषक तत्व अवशोषित न होने से शरीर कमजोर पड़ता है, कई लक्षण उभर आते हैं।
ग्लूटेन त्यागना मजबूरी नहीं, आवश्यकता है। यह क्षति रोकता है, स्वास्थ्य सुधारता है और दैनिक जीवन को ऊर्जावान बनाता है। अनदेखी करने पर पेटदर्द, असमय थकान, वजन हानि जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। दीर्घकालिक प्रभाव में खून की कमी, ऑस्टियोपोरोसिस और पोषण असंतुलन हो सकता है।
सुरक्षित भोजन में फल, हरी सब्जियां, अनाज जैसे बाजरा-मक्का, बीन्स-नट्स प्रमुख हैं। इनसे संपूर्ण आहार मिलता है।
ग्लूटेनयुक्त आहार जैसे रोटी, नूडल्स, बेकरी उत्पादों से परहेज करें। रेस्तरां में भी सावधानी बरतें, वैकल्पिक व्यंजनों का चयन करें।
यह जीवनशैली परिवर्तन रोग प्रबंधन से कहीं आगे ले जाता है—यह पूर्ण कल्याण का आधार है, ऊर्जा बनाए रखता है और जटिलताओं से बचाता है।